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Haryana: अब बिजली से चलेंगे ट्रक, हरियाणा में 25 ट्रक सड़क पर, डीजल वाले ट्रक से सस्ते हैं बिजली के ट्रक

Satyakhabarindia

Haryana: केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को प्राथमिकता देते हुए अब हरियाणा में 25 इलेक्ट्रॉनिक ट्रक मैदान में उतार दिए हैं। गन्नौर के गांव पांची गुजरान स्थित दिल्ली इंटरनेशनल कार्गो टर्मिनल प्राइवेट लिमिटेड (डीआईसीटी) में बुधवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत के पहले वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग एवं चार्जिंग स्टेशन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उनके साथ केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमार स्वामी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि आज भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन लाजिस्टिक कास्ट अब भी चीन से दोगुनी है। सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए वैकल्पिक ईंधन पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि अब किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ईंधन दाता भी बनेगा। पराली से बायोफ्यूल बनने लगा है और महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश की सड़कों पर इसका उपयोग हो रहा है। देश में 50 लाख टन पराली का उपयोग बायोइथेनाल बनाने में किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वह स्वयं इथेनाल से चलने वाली गाड़ी में यहां पहुंचे हैं, जिससे प्रदूषण में भी कमी आई है। गडकरी ने कहा कि अब कृषि यंत्रों और वाहनों के लिए फ्लेक्सी इंजन तैयार किए जा रहे हैं और बैटरी की कीमतों में 50 से 60 प्रतिशत तक कमी आई है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे पराली जलाने की बजाय उसका उपयोग ईंधन उत्पादन में करें, ताकि पर्यावरण भी बचे और किसानों की आमदनी बढ़े।

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देश में ट्रक कुल वाहनों का केवल 4% हैं, लेकिन ये 30% कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। इलेक्ट्रिक ट्रकों के उपयोग से प्रदूषण में भारी कमी आएगी।

जानकारी के मुताबिक, सोनीपत के दिल्ली इंटरनेशनल कार्गो टर्मिनल (डीआईसीटी) गन्नौर में करीबन 350 कॉमर्शियल वाहन हैं, जो अलग-अलग हिस्सों में सामान को पहुंचाने का काम करते हैं। सभी वहां डीजल के हैं अब धीरे-धीरे इनको बैटरी से चलने वाले वाहनों में तब्दील किया जा रहा है। पहले चरण में 25 इलेक्ट्रिक ट्रक पहुंच चुके हैं और टोटल 75 पहुंचने हैं। एनर्जी इन मोशन कंपनी का रविंद्रा एनर्जी लिमिटेड कंपनी के साथ 50% की हिस्सेदारी है।

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अब तकनीक और बैटरी की कीमतें इतनी कम हो गई हैं कि इलेक्ट्रिक ट्रक बिना किसी सरकारी सहायता के भी डीजल ट्रकों से सस्ते होंगे। ड्राइवर ट्रक की बैटरी को केवल 5 मिनट में स्वैप कर सकते हैं, जिससे लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। इन स्टेशनों में उपयोग होने वाली बिजली रविंद्रा एनर्जी की सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं से प्राप्त होगी, जो पूरी प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल बनाती है। यह ट्रक 40 टन तक का लोड उठा सकते हैं और एक बार चार्ज पर 180 किलोमीटर तक चल सकते हैं।

भविष्य की योजना

2030 तक उत्तर भारत में 7,000 इलेक्ट्रिक ट्रक चलाने का लक्ष्य है। इसके लिए लगभग 250 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें 2027 तक 45 और स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, खासकर सीमेंट, स्टील और माइनिंग क्षेत्रों में।

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